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Types of Economic Planning

Types of Economic Planning

Economic Planning refers to any plans of economic activity which point to achieve specific social and economic goals. The types of economic planning are discussed below.

Imperative Planning

  • In this type of planning, the Central Planning Authority decides upon every aspect of the economy and the targets set and the processes delineated to achieve them are to be strictly followed.
  • This type of planning is mainly practiced in the socialist economy.

Indicative Planning

  • In this type of planning, the State sets broad parameters and goals for the economy. Not much specific goals are set in this type of planning.
  • It is adopted in our country since the eighth five-year plan, as practiced in many developed countries.

Centralized Planning

  • One central authority formulates plan, targets and priorities for all sectors.
  • It is also called Top to bottom planning.

Perspective Planning

  • This type of planning is for a long period of time, usually 15-20 years. It is implemented by breaking the plan period into smaller plans such as annual plan or five-year plan.

Rolling Plan

  • Under the rolling plan, a plan for fixed number of years, say three, four or five is formulated. It is revised every year as the requirements of the economy.

आर्थिक नियोजन के प्रकार (Types of Economic Planning in Hindi)

आर्थिक नियोजन आर्थिक गतिविधियों की योजना को दर्शाती है जिसके द्वारा विशिष्ट सामाजिक और आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने करने की दिशा में प्रयास किया जाता है। आर्थिक नियोजन के प्रकार नीचे दिए गए हैं।

आदेशात्मक नियोजन

  • इस प्रकार की योजना में, केन्द्रीय योजना प्राधिकरण अर्थव्यवस्था के हर पहलू को तय करता है और लक्ष्य निर्धारित करता है और उनको प्राप्त करने के लिए चित्रित प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन किया जाता है।
  • इस प्रकार की योजना मुख्यतः समाजवादी अर्थव्यवस्था में प्रचलित है।

निर्देशात्मक नियोजन

  • इस प्रकार की योजना में, राज्य अर्थव्यवस्था के लिए व्यापक मापदंडों और लक्ष्यों को निर्धारित करता है। इस प्रकार की नियोजन में बहुत विशिष्ट एवं विस्तृत लक्ष्य राज्य द्वारा निर्धारित नहीं किये जाते हैं।
  • यह कई विकसित देशों में प्रचलित है तथा इसे आठवीं पंचवर्षीय योजना के बाद से हमारे देश में भी अपनाया गया है।

केंद्रीय नियोजन

  • एक केंद्रीय प्राधिकरण सभी क्षेत्रों के लिए योजना, लक्ष्य और प्राथमिकताओं को तैयार करता है।
  • इसे टॉप टू बॉटम योजना नाम से भी जाना जाता है।

परिप्रेक्ष्य नियोजन

  • इस प्रकार की योजना लंबी अवधि, आम तौर पर 15-20 वर्ष के लिए होती है। इस योजना की अवधि को छोटी अवधि की योजनाओं में तोड़कर लागू किया जाता है जैसे वार्षिक योजना या पंचवर्षीय योजना।

रोलिंग प्लान

  • रोलिंग प्लान के तहत, नियत वर्ष (तीन, चार या पांच वर्ष) की एक योजना तैयार की जाती है। इसमें अर्थव्यवस्था की आवश्यकताओं के अनुसार प्रत्येक वर्ष संशोधन किया जाता है।