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Vedas in Hindi वेद एवं उनके प्रकार

Vedas in Hindi | वेद एवं उनके प्रकार

Hello दोस्तों, आज Myindiagk आप लोगों के लिए Vedas in Hindi |वेद एवं उनके प्रकार | post लेकर आया है, जिसमें  वेद,  उनके विभिन्न प्रकार, उपवेद तथा उच्चारणकर्ता सहित विभिन्न परीक्षोपयोगी जानकारी दी गयी है। इस topic से संबंधित प्रश्न विभिन्न Competitive Exams जैसे कि SSC CGL, SSC CHSL, Railway Exams, UPSC, NDA, CDS Exams इत्यादि में पूछे जाते हैं।  आशा है कि इस post में दी गयी जानकारी से आप लाभान्वित होंगे। यदि आपका कोई सुझाव या प्रश्न हो हो तो आप Comment करके बता / पूछ सकते हैं।

Vedas in Hindi वेद एवं उनके प्रकार

Vedas in Hindi वेद एवं उनके प्रकार

वेद हिन्दू धर्म का सर्वोपरि धर्मग्रन्थ हैं। वेद शब्द संस्कृत भाषा के शब्द ‘विद’ से बना है जिसका अर्थ होता है ‘सभी प्रकार का ज्ञान’। वेद मानव सभ्यता का सबसे पुराना लिखित ग्रन्थ है।

ऋग्वेद

ऋग्वेद वैदिक संस्कृत मन्त्रों का एक प्राचीन भारतीय संकलन है। यह दुनिया का सबसे पुराना लेख है; इसलिए ‘मानव जाति के पहले वसीयतनामा’ के रूप में जाना जाता है। ऋग्वेद के मन्त्रों का वर्णन ‘होतृ या होता’ द्वारा किया गया। ऋग्वेद 1,028 सूक्त और लगभग 10,600 छंद/ ऋचाओं का संग्रह है जोकि दस मंडल में व्यवस्थित हैं। ऐसा माना जाता है कि पहला और अंतिम मंडल बाद में जोड़ा गया । तीसरे मंडल में गायत्री मंत्र (सावित्री) का उल्लेख किया गया है। 9वें मंडल में भगवान ‘सोम देव’ का उल्लेख किया गया है। 10वें मंडल में प्रसिद्ध पुरुषसूक्त शामिल है जिसमें पहली बार शूद्र वर्ण  का उल्लेख मिलता है।

यजुर्वेद

यजुर्वेद का अर्थ होता है श्रेष्ठतम कर्म की प्रेरणा। यजुर्वेद एक कर्मकांड प्रधान अनुष्ठान वेद है। इस वेद को बलि प्रदान के समय उच्चारित किए जाने वाले पुस्तक के रूप में भी जाना जाता है। यह गद्य एवं पद्य दोनों शैली में है। यजुर्वेद के गद्यों एवं पद्यों का उच्चारण करने वाले को ‘अध्वर्यु’ कहते हैं।

सामवेद

साम का अर्थ रूपांतरण तथा संगीत, सौम्यता और उपासना होता है। सामवेद, धुनों और मंत्रों का वेद है। यह एक प्राचीन वैदिक संस्कृत पाठ है, और हिंदू धर्म ग्रंथों का एक हिस्सा है।

अथर्ववेद

अथर्व का अर्थ अकंपन, तथा श्रेष्ठ कर्म करते हुए जो परमात्मा की उपासना में लीन रहता है वही अकंप बुद्धि को प्राप्त होकर मोक्ष धारण करता है।। अथर्ववेद चौथा और अंतिम वेद है जिसमें बुराइयों और रोगों को दूर करने के लिए मंत्र समाहित हैं। यह वेद ‘जादुई सूत्रों की पुस्तक’ के रूप में भी जाना जाता है।

वेदों के उपवेद

कात्यायन के अनुसार, आयुर्वेद ऋग्वेद का तथा धनुर्वेद यजुर्वेद का उपवेद है। गन्धर्ववेद सामवेद का तथा स्थापत्यवेद अथर्ववेद का उपवेद है।

सुश्रुत के अनुसार, आयुर्वेद अथर्ववेद का उपवेद है।

 

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