Geography Notes (Zonal Soils)

Geography Notes (Zonal Soils)

  • Zonal soils form latitudinal belts on the globe and have well developed horizon.
  • Soils of the world can be broadly classified into two types: Pedalfer and Pedocal soils.
  • There is a close relationship between the climatic regions, vegetation zones and soils of the world.
  • Pedalfer soils have abundance of Al and Fe. It is divided into5 sub-types.
  • (1) Grey Podzol: This soil is found in the taiga coniferous region of the sub-Arctic climatic zone. This is acidic in nature and unsuitable for agriculture.
  • (2) Grey-brown Podzol: This soil is found in the deciduous forest region of the mid-latitudes. This soil is rich in humus. It is suitable for dairy farming and mixed farming practices.
  • (3) Red-Yellow Podzol: This soil is formed by the process of podozalisation and laterisation in the sub-tropical climatic region. It is devoid of humus.
  • (4) Red Podzol: This soil is also called Terra rossa, and is found in the Mediterranean and lime regions. It is red in appearance due to presence of Fe2O3. It is devoid of humus.
  • (5) Laterite Soil: This soil is formed in the regions of high temperature, abundant rainfall and equatorial forests, where the process of leaching is dominant. The humus is available in ample amount, yet due to consumption by microbes and process of leaching, very little of it is left. Salts of Al and Fe2O3 are found in the upper layers of the soil.

Geography Notes (क्षेत्रीय मिट्टीयाँ)

  • क्षेत्रीय मिट्टीयाँ पृथ्वी पर अक्षांशीय पेटियों का निर्माण करती है और इनके पास अच्छी तरह से विकसित क्षितिज होता है।
  • दुनिया की मिट्टी को मोटे तौर पर दो वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है: पेडल्फ़र और पेडोकल मिट्टी।
  • संसार के जलवायु प्रदेशों, प्राकृतिक वनस्पतियों और मिट्टी के बीच गहरे संबंध होते हैं।
  • पेडल्फ़र मिट्टी में Al और Fe की बहुतायत होती है। इसे 5 उप-वर्गों में वर्गीकृत किया गया है।
  • (1) धूसर पोडजोल: यह मिट्टी उप-आर्कटिक जलवायु क्षेत्र के टैगा शंकुधारी क्षेत्र में पाए जाते हैं। यह प्रकृति में अम्लीय है और कृषि के लिए अनुपयुक्त होती है।
  • (2) धूसर-भूरी पोडजोल: यह मिट्टी मध्य-अक्षांश के पर्णपाती वन क्षेत्र में पाया जाता है। इस मिट्टी में ह्यूमस की मात्रा समृद्ध होती है। यह डेयरी फार्मिंग और मिश्रित खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी है।
  • (3) लाल-पीला पोडजोल: यह मिट्टी उप-उष्णकटिबंधीय जलवायु क्षेत्र में पॉडोज़लाइज़ेशन और लेटेराइजेशन की प्रक्रिया द्वारा बनती है। इसमें ह्यूमस की कमी होती है।
  • (4) लाल पोडजोल: इस मिट्टी को टेरा रोसा भी कहा जाता है, और भूमध्यसागरीय प्रदेशों और चूना क्षेत्रों में पाई जाती है। Fe2O3 की उपस्थिति के कारण यह लाल रंग की होती है। इसमें ह्यूमस की कमी होती है।
  • (5) लेटेराइट मिट्टी: यह मिट्टी उच्च तापमान, प्रचुर वर्षा वाले उष्ण कटिबंधीय वन क्षेत्रों में, निक्षालन क्रिया की अधिकता से निर्मित होती है। ह्यूमस का यहाँ अधिक मात्रा में निर्माण होता है परन्तु जीवाणुओं द्वारा अधिक उपयोग एवं निक्षालन के कारण ह्यूमस कम मात्रा में बचती है।इस मिट्टी के ऊपरी भागों में Fe2O3 तथा Al के लवणों की अधिकता होती है।
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