History Notes (Second Anglo-Maratha War)

Second Anglo-Maratha War

  • The British and the Marathas lived peacefully for the next two decades after the treaty of Salbai. They cooperated to bring about the downfall of Mysore.
  • Lord Wellesley did his best to trap the Maratha Chief’s in his subsidiary alliance but the Marathas rested. But an opportunity was provided by internal conflicts and intrigues of the Maratha power.
  • After the death of Nana Fadanvis, Holkar and Scindhia vied to get control of Poona court. Holkar defeated the combined army of Scindhia and Peshwa Baji Rao II; and they placed Vinayak rao on the seat of Peshwa and Baji Rao II took shelter with the British.
  • He signed the treaty of Bassein in December 1802 to regain his office with the help of the British. He agreed that a British army be positioned in his territory and ceded territory yielding revenue of rupees 26 lakh. He also agreed that his foreign affairs be controlled and directed by the British. Thus, the treaty holdout a very favourable opportunity for establishing the British interest in Maratha Empire.
  • With the treaty of Bassein, Peshwa sold the Maratha prestige to English which was a humiliation that Maratha Chiefs could not bear with.
  • The Bhonsle and the Scindhia came together to challenge to the British. Wellesley began the war from the side of Peshwa against Scindhia and Bhonsle. Many battles were fought at Asia, Aragaon and Laswari. The British won and occupied Aligarh, Delhi and Agra. The power of Bhonsle and Scindhia was completely destroyed and the English became all powerful in north India and Orissa.

 

History Notes (द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध)

  • सलबाई की संधि के बाद अगले दो दशकों तक अंग्रेज और मराठा शांतिपूर्वक रहे। मैसूर के पतन के लिए उन्होंने आपस में सहयोग किया।
  • लॉर्ड वेलेजली ने अपनी सब्सिडियरी अलायन्स में मराठा चीफ को शामिल करने के लिए अपने तरफ से पूरी कोशिश की लेकिन मराठा अलायन्स में शामिल नहीं हुए, परन्तु मराठों की आंतरिक संघर्षों और षड्यंत्रों के कारन वे सब्सिडियरी अलायन्स में शामिल हो गए।
  • नाना फडणविसिस की मृत्यु के बाद, होलकर और सिंधिया ने पूना दरबार पर नियंत्रण पाने के लिए भरपूर प्रयास किया। होल्कर ने सिंधिया और बाजी राव पेशवा II की संयुक्त सेना को हराया; और उन्होंने पेशवा के पद पर विनायक राव को बैठाया और बाजी राव द्वितीय ने अंग्रेजों की शरण ले ली।
  • उसने दिसंबर 1802 में ब्रिटिश सरकार की सहायता से अपने पद को पुनः प्राप्त करने के लिए बेसिन की संधि पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने अपने क्षेत्र में ब्रिटिश सेना की तैनाती की अनुमति प्रदान की और 26 लाख रुपए का राजस्व अंग्रेजों को देने के लिए भी सहमति दे दी। उन्होंने यह भी सहमति व्यक्त की कि उनके विदेशी मामलों को ब्रिटिश द्वारा नियंत्रित और निर्देशित किया जाएगा। इस प्रकार, यह संधि मराठा साम्राज्य में ब्रिटिश हित की स्थापना के लिए एक बहुत ही अनुकूल अवसर प्रदानकर्ता था
  • बेसिन की संधि के साथ, पेशवा ने मराठा की प्रतिष्ठा को अंग्रेजों के हाथों बेच दिया जो कि अपमानजनक था और इस कारन से यह कि मराठा प्रमुखों के सहन के के परे था।
  • भोंसले और सिंधिया ब्रिटिश को चुनौती देने के लिए एक साथ आ गए। वेलेजली ने पेशवा की तरफ से सिंधिया और भोंसले के खिलाफ युद्ध प्रारंभ किया। एशिया, अरागांव और लास्वरी में कई युद्ध लड़े गए थे। ब्रिटिश ने अलीगढ़, दिल्ली और आगरा को जीत कर उनपर कब्जा कर लिया। भोंसले और सिंधिया की शक्ति पूरी तरह से नष्ट हो गई और उत्तर भारत और उड़ीसा में अंग्रेज सर्व शक्तिमान बन गए।
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