Polity Notes (Adjournment Motion)

Adjournment motion

  • Adjournment motion is introduced in the Parliament to draw attention of the House to a definite matter of urgent pubic importance, and needs the support of 50 members to be admitted. As it interrupts the normal business of the House, it is regarded as an extraordinary device.
  • It involves an element of censure against the Government and hence Rajya Sabha is not permitted to make use of this device.
  • The discussion on adjournment motion should last for not less than two hours and 30 minutes.
  • The right tool move a motion for an adjournment of the business of the House is subject to the following restrictions:

(i) It should raise a matter which is definite, factual, urgent and of public importance;

(ii) It should not cover more than one matter;

(iii) It should be restricted to a specific matter of recent occurrence and should not be framed in general terms;

(iv) It should not raise a question of privilege;

(v) It should not revive discussion on a matter that has been discussed in the same session;

(vi) It should not deal with any matter that is under adjudication by court; and

(vii) It should not raise any question that can be raised on a distinct motion.

Polity Notes (स्थगन प्रस्ताव)

  • यह किसी अविलम्बनीय लोक महत्त्व के मामले पर सदन में चर्चा करने के लिए, सदन की कार्यवाही को स्थगित करने का प्रस्ताव है एवं इसके लिए 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। जैसा कि यह प्रस्ताव सदन के सामान्य व्यवसाय को बीच में रोकता है, इसे एक असाधारण उपकरण माना जाता है।
  • इसमें सरकार के खिलाफ निंदा का एक तत्व शामिल है और इसलिए राज्यसभा को इस उपकरण का उपयोग करने की अनुमति नहीं है
  • स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा दो घंटे 30 मिनट से कम नहीं होना चाहिए।
  • यह उपकरण सदन के कार्य के स्थगन के लिए एक प्रस्ताव लेकर निम्न प्रतिबंधों के अधीन आता है:

(i) इसके माध्यम से ऐसे विषय उठाने चाहिए जो निश्चित, तथ्यात्मक, अत्यंत जरुरी और सार्वजनिक महत्व के हों;

(ii) इसमें एक से अधिक मामले को शामिल नहीं किया जा सकता है;

(iii) यह हाल की घटना के किसी विशिष्ट मामले तक सीमित होना चाहिए और न कि साधारण महत्त्व के विषय तक;

(iv) इसके द्वारा विशेषाधिकार के प्रश्न को नहीं उठाया जा सकता है;

(v) इसके माध्यम से किसी ऐसे मामले पर चर्चा नहीं की जा सकती जिस पर उसी सत्र में चर्चा की गई है;

(vi) इसके माध्यम से किसी ऐसे विषय पर चर्चा नहीं की जा सकती है, जो न्यायालय के विचाराधीन हो; तथा

(vii) इसे किसी पृथक प्रस्ताव के माध्यम से उठाए गए विषयों को पुनः उठाने की अनुमति नहीं होती है।

 

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